अपार धन-दौलत की प्राप्ति कराएगा अपरा एकादशी व्रत, एवं जानिए क्यों

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जयपुर- हिंदू धर्म में एकादशी की महिमा का अनेक पुराणों और पुस्तकों में वर्णन मिलता है। पद्मपुराण में तो सभी 24 एकादशी और दो मलमास की एकादशी का बहुत ही महात्मय बताया गया है एवं उसके विधिविधान का भी उल्लेख किया गया है। ऐसे कथा भी है कि स्वयं भगवान राम और श्रीकृष्ण ने भी एकदाशी का व्रत रखा था। एकदशी तिथि हर महीने में दो बार कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की ग्यारहवी तिथि को आती है। 30 मई 2019 को ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष की अपरा एकादशी है जिसे अचला के नाम से भी जाना जाता है। आइए जानें पद्मपुराण में इस एकादशी का क्या महत्व बताया गया है।

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अपार धन की होती है प्राप्ति
अपरा एकादशी व्रत में भगवान त्रिविक्रम की विधि विधान से पूजा की जाती है। भगवान त्रिविक्रम भगवान विष्णु, भगवान विट्ठल और बालाजी तीनों का रूप माने जाते हैं। साथ ही इस दिन व्रत रखने की भी परंपरा है। अपरा का अर्थ होता है अपार इस अनुसार कहा जाता है कि इस दिन व्रत करने से अपार धन-दौलत और धर्म की प्राप्ति होती है।

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पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस दिन व्रत रखने से पूरे संसार में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है, सभी तरह के पापों और कष्टों से प्राणी मुक्त हो जाता है। मान्यता है कि जो भी अपरा एकादशी के व्रत को विधि विधान से करता है, वह सब पापों से मुक्त होकर भगवान विष्णु की सेवा के लिए उनके लोक में हमेशा के लिए चला जाता है।प्राचीन काल में महीध्वज नाम का एक दयालु राजा था।

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उसका छोटा भाई वज्रध्वज उससे ईर्ष्या करता था। एक दिन उसने अपने बड़े भाई की हत्या कर दी और उसके शव को एक पीपल के पेड़ के नीचे दफना दिया। इस अकाल मृत्यु के कारण महीध्वज प्रेत बन गया और आसपास के लोगों को परेशान करने लगा। एक दिन धौम्य ॠषि वहां से जा रहे थे, तभी उन्होंने उस प्रेत को देखा और अपने ज्ञानचक्षु से उस प्रेतात्मा के जीवन से जुड़ी जानकारियां प्राप्त कर लीं।

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प्रेत की परेशानियों को दूर करने के लिए उसे परलोक विद्या दी। इसके बाद राजा महीध्वज को प्रेत योनि से मुक्ति के लिए धौम्य ॠषि ने स्वयं अपरा एकादशी का व्रत रखा। उस व्रत से जो भी पुण्य धौम्य ॠषि को प्राप्त हुआ, वह सारा पुण्य उन्होंने राजा महीध्वज को दे दिया। पुण्य के प्रताप से राजा महीध्वज को प्रेत योनी से मुक्ति मिल गई। इसके लिए राजा ने धौम्य ॠषि को सप्रेम धन्यवाद दिया और भगवान विष्णु के धाम बैकुण्ठ चले गए।

व्रत की विधि

इस दिन सच्चे मन से व्रत और पूजा करने से इच्छित फल की प्राप्ति होती है और अनजाने में हुई सारी गलतियां भी माफ हो जाती हैं। इस व्रत में पूरे दिन व्रत रखकर शाम को भगवान विष्णु की पूजा अर्चना की जाती है। एकादशी वाले दिन सुबह जल्दी उठकर घर की साफ-सफाई करनी चाहिए। स्‍नान करने के बाद स्‍वच्‍छ वस्‍त्र धारण करते हुए व्रत का संकल्‍प लेना चाहिए। भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने दीपक जलाना चाहिए। इसके बाद उन्हें पांच फल और फूल चढ़ाने चाहिए। पूजा में तुलसी के पत्ते जरूर शामिल करने चाहिए। पूजा के बाद एकादशी व्रत की कथा सुननी चाहिए और दूसरों को भी सुनानी चाहिए।

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अपरा एकादशी मुहूर्त:

एकादशी तिथि प्रारंभ: 29 मई 2019 को दोपहर 03 बजकर 21 मिनट

एकादशी तिथि सामाप्‍त: 30 मई 2019 को शाम 04 बजकर 38 मिनट तक

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पारण का समय: 31 मई 2019 को सुबह 05 बजकर 45 मिनट से 08 बजकर 25 मिनट। नोटः एकादशी व्रत का पारण द्वादशी में ही होता है। इसलिए त्रयोदशी तिथि लगने से पूर्व ही ब्राह्मण भोजन करवाकर स्वयं अन्न जल ग्रहण करना चाहिए।

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