घर के सामने क्यों बनाया जाता हैं स्वास्तिक, जानिए इसका महत्व

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हिंदू धर्म में प्रतीको का विशेष महत्व होता हैं यह प्रतीक अपने भीतर अनेक रहस्यों को समेटे हुए होते हैं वही इनका रहस्य वही जान सकता हैं जो संसकृति के इन प्रतीकों को गहराई से जानता और समझता हो। शेष के लिए तो प्रतीक केवल प्रतीक ही बनकर रह जाते हैं उनका कोई अर्थ उनके लिए नहीं निकलता हैं मगर प्रतीकों को जान समझ पाने में सफलता मिलती हैं तो इनसे कई तरह के लाभ भी प्राप्त किया जा सकते हैं। वही आज हम आपको इसके महत्व के बारे में बताने जा रहे हैं तो आइए जानते हैं।प्रतीकों की इस श्रृंखला में स्वास्तिक भी भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता हैं, जिसे सूर्य का प्रतीक माना जाता हैं अपनी संस्कृति में स्वास्तिक के अनगिन आयाम होते हैं और इसे तरह तरह से अभिव्यक्त किया गया हैं। वही स्वास्तिक का सामान्य अर्थ आशीर्वाद देने वाला, मंगल या पुण्यकार्य करने वाला हैं यह शुभ या मांगलिक कार्यों और पुण्यकृतियों की स्थापना के रूप में प्रकट किया जाता हैं। स्वास्तिक का अर्थ आशीर्वाद, मंगल या पुण्य करना बताया गया हैं मतलब सभी दिशाओं में सबका कल्याण हो, ऐसी भावना स्वास्तिक के प्रतीक में सन्निहित हैं देवताओं के चारों ओर घूमने वाले आभामंडल का चिन्ह स्वास्तिक होता हैं, इसलिए इसे देवताओं की शक्ति और सामर्थ्य का प्रतीक माना जाता हैं स्वास्तिक को शास्त्रों में शुभ और कल्याणकारी माना जाता हैं।

वही प्राचीन काल में हमारे यहां कोई भी श्रेष्ठ कार्य करने से पहले मंगलाचरण लिखने की परंपरा थी। मंगलाचरण सभी के लिखना संभव नहीं था। मगर सभी इस मंगलाचरण का महतव जानते थे। और उसका लाभ भी लेना चाहते थे। वही इसलिए ऋषियों ने स्वास्तिक चिन्ह की परिकल्पना की, जिससे सभी के कार्य मंगलप्रद ढंग से संपन्न हो सकें।

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