आप भी जानें आखिर क्या है मकर संक्रांति पर तिल के लड्डू का महत्व

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लाइफस्टाइल डेस्क,जयपुर। तिल के लड्डू खाने में जितने सवादिष्ट होते हैं उतने ही हमारी सेहत के​ लिए फायदेमंद भी होते हैं। वैसे तो सर्दियों में तिल के लड्डू खाना काफी अच्छा होता है लेकिन जब बात पौराणिक और हिन्दू मान्यताओं की हो तो मकर सक्रांति पर तिल के लड्डू का खास महत्व माना जाता है। आइए हम आपको बताते हैं क्यों मकर संक्रांति पर तिल से बनी चीजों व लड्डू को क्यों इतना महत्व दिया जाता है।

तिल के लड्डू का महत्व— माना जाता है कि म​कर संक्रांति के दिन से ही घरों में शादी-ब्याह, मुंडन और नामकरण जैसे शुभ कार्यों की शुरूआत हो जाती है। साथ ही इस दिन तिल और गुड़ से बने लड्डुओं का भी खासा महत्व रहता है । जी हां, उत्तर भारत में खासकर मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी और तिल के लड्डू हर घर में बनाए जाते हैं। मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन ना सिर्फ तिल खाएं जाते हैं बल्कि इन्हें पानी में डालकर स्नान भी किया जाता है। यह परम्परा सालों से चली आ रही है। माना जाता है कि इस दिन तिल से बने व्यंजनों के लिए विशेष होता है।

यह है पौराणिक कथा— पौराणिक कथा के अनुसार माना जाता है कि शनि देव को उनके पिता सूर्य देव पसंद नहीं करते थे। इसी कारण सूर्य देव ने शनि देव और उनकी मां छाया को अपने से अलग कर दिया था। इस बात से क्रोध में आकर शनि और उनकी मां ने सूर्य देव को कुष्ठ रोग का श्राप दे दिया था। पिता को कुष्ठ रोग में पीड़ित देख यमराज ने तपस्या की। यमराज की तपस्या से सूर्यदेव का कुष्ठ रोग खत्म हो गया । सूर्य देव ने क्रोध में आकर शनि देव और उनकी माता के घर कुंभ को जला दिया । इससे दोनों को बहुत कष्ट हुआ। यमराज ने अपनी सौतेली माता और भाई शनि को कष्ट में देख उनके कल्याण के लिए पिता सूर्य को समझाया । यमराज की बात मान सूर्य देव शनि से मिलने उनके घर पहुंचें। कुंभ में आग लगाने के बाद वहां सब कुछ जल गया था, सिवाय काले तिल के । इसीलिए शनि देव ने अपने पिता सूर्य देव की पूजा काले तिल से की।इसके बाद सूर्य देव ने शनि को उनका दूसरा घर ‘मकर’ मिला।
तभी से मान्यता है कि शनि देव को तिल की वजह से ही उनके पिता, घर और सुख की प्राप्ति हुई, तभी से मकर संक्रांति पर सूर्य देव की पूजा के साथ तिल का बड़ा महत्व माना जाता है।

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