Mythology story: शनि के साहस के कारण अल्पायु हो गया था मेघनाद, जानिए पूरी कथा

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​हिंदू धर्म के पवित्र ग्रंथ रामायण को बहुत ही खास माना जाता हैं वही रामायण के कई पात्र ऐसे हैं जिनके बारे में हम सभी जानना चाहते हैं तो आज हम आपको उन्हें के बारे में बताने जा रहे हैं आपको तो पता है कि रावण ज्योतिष विद्या का प्रकाण्ड विद्वान था। एक बार उसने अपने ज्योतिष ज्ञान के बल से सभी ग्रहों को अपने एक स्थिति में रहने के लिए बाध्य कर दिया। इस दौरान जब सभी ग्रह रावण के भय से त्रस्त थे उसी वक्त कर्मुलदाता शनि रावण के खिलाु विद्रोह कर रहा था।

कहा जाता है कि रावण की पत्नी मंदोदरी जब मेघनाथ को जन्म देने वाली थी। तब रावण ने नवग्रहों को एक निश्चित स्थिति में रहने के लिए बाध्य कर दिया था जिससे उत्पन्न होने वाला पुत्र अत्यंत तेजस्वी, शौर्य, पराक्रम से युक्त होता। रावण ने सभी ग्रहों का ऐसा समय साध लिया था। जिस समय में अगर किसी बालक का जन्म होता है तो वह अजेय और दीर्घायु हो जाता हैं।मगर जब मेघनाद का जन्म हुआ, तब सभी ग्रहों ने रावण के भय से उसकी आज्ञा का पालन किया मगर ठीक उसी वक्त शनि ग्रह ने अपनी स्थिति में परिवर्तन कर लिया। रावण इससे अत्यंत क्रोधित हो गया। शनिदेव के इस साहस के कारण रावण का पुत्र पराक्रमी तो हुआ मगर वह अल्पायु हो गया।

भयंकर क्रोध में रावण ने शनि के ऊपर गदा का प्रहार किया जिससे शनि के एक पैर में चोट लग गई और वो पैर से लंगड़े हो गए। मेघनाद अल्पायु होने के कारण रामायण के युद्ध में लक्ष्मण के द्वारा मारा गया था। अगर शनि देव विद्रोह नहीं करते तो मेघनाथ को हरा पाना संभव था। शनि का विद्रोह रामायण युद्ध में अप्रत्यक्ष रूप से अधर्म का नाश और धर्म की विजय के लिए काम आया। शनिग्रह सबका न्याय करने वाले माने जाते हैं जो मनुष्य जैसे कर्म करता हैं शनि उसे वैसा ही फल प्रदान करते हैं।

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