अगर नही जानते है जान लीजिए छाछ पीने के ये चमत्कारी फायदे

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जयपुर- दूध में जोरन (थोड़ा दही) डालने से दही के जीवाणु बड़ी तेजी से बढ़ने लगते हैं और वह दूध 4-5 घंटों में ही जमकर दही बन जाता है। दही में पानी डालकर मथने पर मक्खन अलग करने से वह छाछ बनता है। छाछ न ज्यादा पतली होती हो, न ज्यादा गाढ़ी। ऐसी छाछ दही से ज्यादा गुणकारी होती है। आइये जानते हैं

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छाछ पीने के फायदे :

1.पाचन शक्ति सही करता है :

अगर आपकी पाचन शक्ति सही नहीं है कमजोर हो तो आप buttermilk में भुना हुआ जीरा , काली मिर्च का चूर्ण और सेंधा नमक मिलकर पी सकते है जिसकी वजह से आपके द्वारा लिया गया भोजन जल्दी पचता है |

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2.Calcium की कमी को पूरा करता है :

महिलाओं में होने वाले मीनोपोज के समय उनके लिए खाने में buttermilk को शामिल करना एक बेहतर विकल्प हो सकता है calcium की कमी को पूरा करने का क्योंकि मीनोपोज के समय कई तरह की शारीरिक परेशानियाँ उन्हें झेलनी पड़ती है जिनमे जोड़ों में होने वाला दर्द और कमर दर्द भी शामिल है |

 

3.लू से बचाता है :

गर्मी के मौसम में लू लगने से बचने छाछ  का उपयोग करना चाहिए।

4 .रोग प्रतिरोधकता बढ़ता है

इसमें हेल्‍दी बैक्‍टीरिया और कार्बोहाइड्रेट्स होते हैं साथ ही लैक्‍टोस शरीर में आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाता है, जिससे आप तुरंत ऊर्जावान हो जाते हैं।

6. खून साफ़ होता है :

गाय की ताजा, फीकी छाछ पीने से रक्तवाहनियों (खून की नलियों) का खून साफ हो जाता है और रस बल तथा पुष्टि बढ़ती है तथा शरीर की चमक बढ़ जाती है। इससे मन प्रसन्न होता है तथा यह वात, कफ संबन्धी रोगों को नष्ट करती है।

मट्ठे (छाछ ) के औषधीय प्रयोग :

1. मट्ठे(mattha) में जीरा, सौंफ का चुनर व सेंधा नमक मिलाकर पीने से खट्टी डकारें बंद होती हैं |

2. गाय का ताजा, फीका मट्ठा(buttermilk) पीने से रक्त शुद्ध होता है और रस, बल तथा पुष्टि बढ़ती है | शरीर – वर्ण निखरता है, चित्त प्रसन्न होता है, वात-संबंधी अनेक रोगों का नाश होता है |

 

3. ताजे मट्ठे(buttermilk) में चुटकीभर सोंठ, सेंधा नमक व काली मिर्च मिलाकर पीने से आँव, मरोड़ तथा दस्त दूर हो के भोजन में रूचि बढ़ती है |

4. मट्ठे में अजवायन और काला नमक मिलाकर पीने से कब्ज मिटता है |
उपरोक्त सभी गुण गाय के ताजे व मधुर मट्ठे में ही होते हैं | ताजे दही को मथकर उसी समय मट्ठे का सेवन करें | ऐसा मट्ठा दही से कई गुना अधिक गुणकारी होता है | देर तक रखा हुआ खट्टा व बासी मट्ठा हितकर नही है |

5. केवल ताजे दही को मथकर हींग, जीरा तथा सेंधा नमक डाल के पीने से अतिसार, बवासीर और पेडू का शूल मिटता है |

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