Adhikmas 2020: अधिकमास में करें दक्षिणावर्ती शंख की पूजा, भगवान विष्णु का मिलेगा आशीर्वाद

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हिंदू धर्म में शंख को बहुत ही खास और पवित्र माना जाता हैं, धार्मिक कर्मकांड में शंख बजाने की विशेष परंपरा हैं शंख को मागलिक कार्यों, शादी विवाह, धार्मिक अनुष्ठानों और रोज पूजा पाठ में बजाने का नियम हैं शास्त्रों के मुताबिक घर के पूजन स्थल में शंख का होना शुभ माना जाता हैंशंख बजाने का धार्मिक महत्व के साथ साथ वैज्ञानिक महत्व भी होता हैं शंख की ध्वनि वातावरण शुद्ध करती हैं साथ ही इसको बजाने से कई तरह के कीटाणु नष्ट हो जाते हैं तो आज हम आपको शंख का धार्मिक महत्व बताने जा रहे हैं तो आइए जानते हैं। ऐसा कहा जाता है कि शंख की उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुई।शंख उन 14 रत्नों में एक था जो समुद्र से निकले थे वही विष्णु पुराण के मुताबिक शंख माता लक्ष्मी का भाई माना जाता हैं इसलिए जिस घर में शंख होता है उस घर में देवी लक्ष्मी का वास जरूर होता हैं शास्त्रों में तीन तरह के शंख बताए गए हैं जिनमें पहला दक्षिणावृत्ति, दूसरा मध्यावृति और तीसरा वामवृत्ति होता हैं इनमें दक्षिणावृत्ति शंख भगवान श्री हरि विष्णु का प्रिय होता हैं।वही वास्तु और फेंगशुई के मुताबिक शंखनाद और शंख रखने के कई लाभ मिलते हैं वास्तु के मुताबिक शंख को रोजाना बजाने से सेहत के लिए अच्छा होता हैं फिर चाहे वह छोटा शंख हो या फिर बड़ा। ऐसी मान्यता है कि शंख बजाने से ह्रदय संबंधी बीमारियां नहीं होती हैं शंख रखना भी शुभ माना गया हैं यह कार्यक्षेत्र में सुख समृद्धि लेकर आता हैं। इसे रखने से कारोबार में वृद्धि होती हैं।

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